hindi-story-jaan-bachi-to-laakon-paaye-जान-बची-तो-लाखों-पाए

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दक्षिण भारत के घने जंगल, इतने प्रसिद्ध हो गए थे कि वहां पर दूर- दूर तक कोई भी राहिगर नजर नहीं आता था। इन भयंकर जंगली जानवरों के कारण लोग लंबा रास्ता तय करके दूसरी ओर जाते थे और इस प्रकार पुरे वन में इन जानवरों का पूरा अधिकार हो गया। hindi story jaan bachi to laakon paaye जान बची तो लाखों पाए

आगे की कहानी

इन जंगली जानवरों में एक गीदड़ भी था, जो अभागा अकेला ही छोटी-सी गुफा के एक कोने में रहता था।

बड़ा शिकार करने की उसकी हिम्मत तो थी नहीं, इसलिए वो छोटे-मोटे, कमजोर पशु-पक्षियों का शिकार करके अपना पेट किसी ना किसी तरह भर लेता था।      

यदि भोजन से पेट भरा हो तो अच्छी नींद आ जाए और यदि नहीं भरा हो तो नींद आती ही नहीं। यही हाल, उस गीदड़ का था, जो पुरे दिन भूख के कारण इधर-उधर घूमता रहता था ताकि भोजन का प्रबंध हो जाए।          

भूख के मारे जंगल में जाना

एक बार वह भूखा ही जंगल में घूम रहा था तो उसने रास्ते में एक हाथी को मरा हुआ देखा।

मरे हुए हाथी को देखकर उसके पेट में भूख के मारे चूहे कूदने लगे और मन ही मन सोचते हुए वो बोला “आहा !…… आज तो मजा आ गया, हाथी का मोटा-मोटा मॉस खाने को मिलेगा और वो भी कई दिनों तक, मजा आ गया।

बड़े उत्साह से, जैसे ही उसने हाथी के मॉस पर, अपने दाँत खाने के लिये गड़ाये तो उसके दाँत फिसल कर रह गए। हाथी  की खाल तो पत्थर की तरह थी जो गीदड़ के दाँतों से कहाँ टूटने वाली थी।  

हार कर वह एक कोने में खड़ा हो गया। इस आशा में कि कोई ना कोई बड़े नुकीले दाँतों वाला शेर या भेड़िया आएगा और उस शिकार को उधेड़ देगा तो वह बाद में उसे आराम से खा लेगा।


शेर का आना

थोड़ी देर बाद एक शेर वहां पर आया और जैसे ही शेर हाथी के पास पहुंचा तो गीदड़, शेर की ओर गया और बोला “जंगल के राजा? मैं आपके स्वागत के लिए खड़ा हूँ और इस शिकार की भी रक्षा कर रहा हूँ, जिसपर पहला अधिकार आपका ही है।

जबतक आप इसका भोग नहीं लगायेंगें, तबतक मैं कहाँ से मुहँ लगा सकता हूँ।   

गीदड़, क्या तुम यह नहीं जानते कि हम जंगल के राजा हैं, हम किसी के शिकार और मुर्दा जानवर को नहीं खाते है।

हम केवल अपने किये गए शिकार का ही भोजन करते हैं। समझे, बुजदिल।” यह कहकर शेर वहां से चला गया और बेचारे गीदड़ की सारी खुशियां छू मंतर हो गई।     

गीदड़ एक कोने में जाकर खड़ा हो गया, इस इंतजार में कि कोई ओर वहां पर आएगा।

भेड़िये का आना

थोड़ी देर बाद वहां पर एक भेड़िया आया, जिसे देखकर गीदड़ पहले तो बहुत खुश हुआ लेकिन फिर सोचने लगा कि यदि इस भेड़ियें ने हाथी को खाना शुरू किया तो यह अपने पुरे परिवार और अपने रिश्तेदारों को भी बुला लाएगा और यह सब कुछ ही देर में पूरा भोजन चट कर जायेंगें ।

मेरे लिए कुछ भी नहीं बचेगा। कैसे भी हो, मैं इसे शिकार को खाने नहीं दूंगा, चाहे कोई भी तरकीब दौड़ानी क्यों ना पड़ जाएँ।

यही सोचकर गीदड़ भेड़ियें के पास जाकर बोला “भैय्या, इस हाथी को देख रहे हो न?”

“हाँ, देख रहा हूँ, लगता है आज तो अपनी लाटरी लग गई है। अब तो हमारा पूरा परिवार कई दिनों तक भोजन का आनंद लेगा।”

“भाई मेरे! अब आनन्द लेने की बात तो भूल ही जाओ।”

“ऐसा क्यों?” आश्चर्य से गीदड़ की ओर देखकर, भेड़िया बोला।”

“मैंने इसलिए कहा कि यह शिकार, शेर का है और वह नहाकर अभी आ रहा है, उसने मुझे रखवाली करने को कहा है कि शिकार का ध्यान रखना, कोई इसे खा ना जाए।”

भेड़िये ने जैसे ही यह सुना कि यह शिकार शेर का है और वह अभी आने ही वाला है, तो वह वहां से भाग खड़ा हुआ।

“चलो, यह मुसीबत तो टली।” गीदड़ ने राहत लेते हुए कहा।

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भेड़िये के जाते ही, वहां पर एक चीता आ गया।

गीदड़ को पता था कि चीते के दाँत बहुत तेज होते है, इससे हाथी की सख्त खाल को कटवाकर अपना पेट भरा जा सकता है। चीते बेचारे तो सीधे होते हैं, जैसा भी कहूंगा, यह मान जाएगा।”

गीदड़ ने बड़े उत्साह से चीते का स्वागत किया और हाथ जोड़कर बोला “मामाजी को प्रणाम हो, आपका बच्चा आपके स्वागत के लिए बेताब हो रहा है।”

चीता आश्चर्य से “मेरा स्वागत और तुम……… , आज तो जरूर दाल में कुछ काला है, जो तुम मेरे आगे हाथ जोड़कर खड़े हो।”

“मामा जी ऐसी कोई बात नहीं, सुबह-सुबह शेर ने इस हाथी का शिकार कर डाला, मुझे इसकी रक्षा के लिए खड़े करके, स्वयंम नहाने चले गए हैं।

अब तुम आ ही गए हो तो मुझे अपने मामा की सेवा तो करनी ही होगी। अब आप चलकर इस हाथी के मॉस से अपना पेट भरें।

मैं, इस ओर खड़ा शेर को देखता हूँ, जैसे ही शेर आएगा, तुम्हें बता दूंगा, तुम उसी समय भाग जाना।”

“वाह-वाह भांजें, क्या खूब बात की है, मजा आ गया, आज तो खाने को खूब मिलेगा। भांजा हो तो तेरे जैसा। यह कहने के बाद चीता हाथी की खाल काटने लग गया। “

गीदड़ की नजर चीते पर ही थी, जैसे ही चीते ने हाथी की खाल उतारी तो गीदड़ ने शोर मचा दिया “शेर आ गया……. शेर आ गया मामा, शेर…… मामा ………    शेर आ गया।”

यह सुनते ही चीता डर के मारे भाग खड़ा हो गया।

गीदड़ हंस दिया। …….. और हाथी की ओर बड़ा, अब तो रास्ता साफ़ हो चुका है। चीता, बेचारा कहता जा रहा था “जान बची तो लाखों पाए, जान बची तो लाखों पाए।”

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि शरीफ और सीधे लोग चालाक लोगों की बातों में बड़ी आसानी से फंस जाते हैं। तेज बुद्धि हो तो प्राणी बड़ी से बड़ी विपत्ति में भी विजय पा लेता है।   

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आप सबका शुभचिंतक

P C JOSHI

hamaarijeet.com  

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